Wednesday, June 22, 2011

इक कागज़ की नाव पर कल्,
मैने कुछ् तेरे नाम लिखा था,
और छोडा था उसे उस पानी मैं ,
जो बहा था बारिशों में मेरे घर से तेरे दर की ओर.
दूर तक नज़रों ने पीछा भी किया था उसका ,
सुबह उठा तो पता चला कि वो सपना था....
बाहर देखा तो सडकें लबालब थी पानी से.
हिस्ट्री की कोपी से पन्ना भी फटा मिला.
एक बार दरवाज़े से बाहर देखना,
मेरा सपना बह कर आया हो तो सुखा कर रख लेना !!!

Thursday, November 18, 2010



मेरे पापा



मैने जब भी घुटने टेके

उनके घुटने दुखते हैं .

मैं रोऊं तो वो भीगे से

पलकों पर ही फिरते हैं

वो मेरी खुशियों में ही

अपने सपने बुनते हैं

मेरे पापा मेरे जैसे

मुझ में ही तो बसते हैं


रात रात भर जागे जागे

मेरे लिये घड़ी दुनिया

कतरा कतरा नमक बहा कर

मुझको दी सारी खुशियां

उनके बनाये हर गहने में

मेरे ख्वाब चमकते हैं

मेरे पापा मेरे जैसे

मुझ में ही तो बसते हैं


मैं टूटा तो वो भी बिखरे

मैं जीता तो जीत गये

मै जब जब भी हुआ अकेला

कंधे पर वो हाथ मिले

अंधेरों में हाथ पकड़ कर

रौशन दुनिया करते हैं

मेरे पापा मेरे जैसे

मुझ में ही तो बसते हैं


तेज धूप में आड़ मे लेकर

सारी छाया मुझको दी

खुद सोये गीले बिस्तर पर

गरम रजायी मुझको दी

मौसम बदले दुनिया बदली

पापा नहीं बदलते हैं

मेरे पापा मेरे जैसे

मुझ में ही तो बसते हैं





Wednesday, August 25, 2010

जुबां के छाले

हमने अपने जीने के कुछ यों अंदाज़ निकाले हैं,
होठों पे लतीफ़े रखते हैं माना की जुबां पर छाले हैं,

किस्मत ने तो कोई भी कसर न बाकी छोड़ी है,
याद हैं तेरी जो मुझको इस मुश्किल में संभाले हैं,

एक अधखिला ग़ुमचा भी रास न आया ज़ालिम को,
अरसे से कुछ गुलफरोश अपना डेरा डाले हैं,

मैं तो रुसवा ठहरा लेकिन वो तो इज्ज़त वाले हैं,
मेरे साथ क्यों दुनिया वाले उनका नाम उछाले हैं,

इक उम्मीद कहीं बाक़ी है बिना चाँद की रात में भी
कुछ लम्हों की रात है फिर उजाले ही उजाले हैं

जब से उसने ख़ाना ए दिल छोड़ा है वीरानी है,
ग़र्द जमी है फ़र्श पे और दीवारों पर जाले हैं ।।